Marrakech

मराकेश मोरक्को के चार शाही शहरों में से एक है, जो उच्च एटलस की तलहटी के पश्चिम में तेंसिफ़्त नदी के मैदान में फैला है। लगभग 1070 में अल्मोराविदों द्वारा स्थापित यह शहर एक राजनीतिक और सांस्कृतिक राजधानी बन गया, जिसकी लाल मिट्टी की दीवारों और इमारतों ने इसे लाल शहर का उपनाम दिया। 2014 की जनगणना में यहाँ लगभग 9.29 लाख लोग रहते थे, और यह मराकेश-सफ़ी क्षेत्र की राजधानी है।

दीवारों से घिरी मदीना, जो 1985 से यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, में जमा अल-फ़ना चौक, सूक़ (बाज़ार), कुतुबिया मस्जिद और सदियों पुराने महल, मदरसे और बाग़ हैं। दीवारों के बाहर बर्फ़ से ढके एटलस पहाड़ पहाड़ी घाटियों की दिन की सैर के लिए सहज पृष्ठभूमि बनते हैं, और पश्चिम में अटलांटिक का बंदरगाह एस्साउइरा है। मराकेश जोड़ों, खाने और डिज़ाइन के शौक़ीनों, बड़े बच्चों वाले परिवारों और शहर की छुट्टी को पहाड़ों के साथ मिलाने वाले यात्रियों के लिए ठीक है। हॉलिडे रेंटल में मदीना के रियाद, यानी आँगन के चारों ओर बने पारंपरिक घर, से लेकर गेलीज़ और इवरनाज के अपार्टमेंट और पाल्मरे के विला तक मिलते हैं।

मराकेश में कहाँ ठहरें

मदीना में ठहरने का मतलब है रियाद में सोना, यानी पेड़-पौधों वाले आँगन की ओर भीतर मुड़ा एक घर, जो कमरों को निजी और ठंडक भरा रखता है। जमा अल-फ़ना के उत्तर-पश्चिम की गलियाँ, जैसे अल-क़सूर मोहल्ला, गेस्टहाउस के रूप में इस्तेमाल होने वाले रियादों से भरी हैं, और सूक़ थोड़ी ही पैदल दूरी पर हैं। दक्षिण-पश्चिम में सादी मक़बरों वाला क़स्बा मोहल्ला और पुराना यहूदी मोहल्ला मेल्लाह थोड़े ज़्यादा शांत हैं। मदीना की गलियाँ संकरी हैं और कई में कारें नहीं जा सकतीं, इसलिए पहुँचने पर किसी के लेने आने का इंतज़ाम कर लें।

फ़्रांसीसी नगर-योजनाकार आनरी प्रोस्त द्वारा 1913 में बसाए गए नए शहर का सबसे पुराना हिस्सा गेलीज़ आज व्यापारिक केंद्र है, जहाँ एवेन्यू मोहम्मद पंचम के किनारे अपार्टमेंट, दुकानें, गैलरियाँ और कैफ़े हैं। इसके बगल में इवरनाज विला और बड़े होटलों वाला एक संपन्न इलाक़ा है, जो मदीना की दीवारों के पास है। शहर के उत्तर में खजूर का विशाल बाग़ पाल्मरे दीवारों से घिरे, बग़ीचों और पूल वाले विलाओं का इलाक़ा है, जो जगह चाहने वाले परिवारों और समूहों के लिए ठीक है।

मदीना, जमा अल-फ़ना और सूक़

जमा अल-फ़ना पुराने शहर का दिल है। दिन में यहाँ संतरे के रस के स्टॉल और पानी बेचने वाले होते हैं; दोपहर ढलते-ढलते भीड़ बढ़ जाती है और क़िस्सागो, संगीतकार, नर्तक और खाने के स्टॉल छा जाते हैं। यूनेस्को ने 2001 में इस चौक की मौखिक धरोहर की परंपराओं को मान्यता दी, और अब वे मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की उसकी सूची में हैं।

चौक के उत्तर में सूक़ ढकी हुई गलियों से होकर घूमते हैं, जो चमड़े, धातु के काम और मिट्टी के बर्तनों से लेकर क़ालीनों और लालटेनों तक, पेशे के हिसाब से बँटी हैं। लगभग 18 सूक़ों में 40,000 से ज़्यादा लोग दस्तकारी में काम करते हैं। मोलभाव आम बात है, और नक़्शा हाथ में रखना अच्छा है, क्योंकि इन गलियों में रास्ता भटकना आसान है। चौक से लगभग 200 m पश्चिम में कुतुबिया मस्जिद है, जिसकी लगभग 77 m ऊँची मीनार शहर की पहचान है। मस्जिद में नमाज़ होती है और ग़ैर-मुसलमानों को भीतर जाने की अनुमति नहीं है, पर इसके बाग़ों और मीनार को बाहर से निहारा जा सकता है। 1122 और 1123 में बनी मदीना की दीवारें आज भी पुराने शहर को घेरे हुए हैं।

महल, बाग़ और इतिहास

अल्मोराविदों के बाद अल्मोहादों ने 1147 में मराकेश पर क़ब्ज़ा किया और कुतुबिया, मेनारा बाग़ और अगदाल बाग़ बनवाए, जिनके फलों के बाग़ों और जलाशयों को एटलस की तलहटी से आने वाली भूमिगत नहरें पानी देती थीं। सादी राजवंश ने 16वीं सदी में इस शहर को फिर से अपनी राजधानी बनाया: 1578 में सुल्तान अहमद अल-मंसूर द्वारा शुरू किया गया खंडहर हो चुका अल-बदी महल और सादी मक़बरे उसी दौर के हैं, और 1564 और 1565 में पूरा हुआ बेन यूसुफ़ मदरसा मोरक्को की वास्तुकला की एक उत्कृष्ट कृति है।

19वीं सदी में बना और 1894 से 1900 के बीच वज़ीर-ए-आज़म बा अहमद द्वारा बढ़ाया गया बाहिया महल चित्रित छतें और आँगन दिखाता है। शहर अपने सात संरक्षक संतों के मक़बरों के लिए भी जाना जाता है। नए शहर में मजोरेल बाग़, जिसे चित्रकार जाक मजोरेल ने 1923 से बनाया और बाद में यवेस सेंट लॉरेंट ने बहाल किया, गहरे नीले रंग के एक विला के चारों ओर कैक्टस, खजूर और बाँस को एक साथ पेश करता है। सितंबर 2023 में इस क्षेत्र में एक घातक भूकंप आया, और कुछ स्मारकों को नुक़सान पहुँचा।

खाना और स्थानीय रीति-रिवाज

शहर का ख़ास व्यंजन तंजिया मराकशिया है, गाय का मांस जिसे मसालों और स्मेन, यानी लंबे समय तक रखे जाने वाले मक्खन, के साथ मिट्टी के एक घड़े में एक पारंपरिक भट्टी की गर्म राख में दबाकर धीमी आँच पर पकाया जाता है। दूसरे पसंदीदा व्यंजनों में हरीरा, यानी मसूर और काबुली चने का शोरबा; पस्तीला, यानी चिकन या कबूतर, बादाम और दालचीनी वाली फ़िलो पेस्ट्री की पाई; और जमा अल-फ़ना के शाम के स्टॉलों पर सेंके जाने वाले कोफ़्ता और मर्गेज़ शामिल हैं। गिलास से काफ़ी ऊपर से उँडेली जाने वाली पुदीने की चाय लगभग हर जगह स्वागत में पेश की जाती है।

मोरक्को एक मुस्लिम देश है, और शालीन कपड़े सम्मानजनक माने जाते हैं, ख़ासकर धार्मिक स्थलों के पास; बाँहें और टाँगें ढकने वाले ढीले कपड़े सबसे आसान विकल्प हैं। रमज़ान के दौरान दिन में सार्वजनिक जगहों पर खाना, पीना या धूम्रपान करना लोगों को बुरा लग सकता है। शराब सिर्फ़ लाइसेंस प्राप्त जगहों पर बिकती है, और सड़क पर शराब पीना ग़ैरक़ानूनी है। रीति-रिवाज और नियम बदल सकते हैं, इसलिए जाने से पहले मौजूदा आधिकारिक यात्रा सलाह देख लें।

एटलस और उससे आगे की दिन की सैर

शहर से लगभग 30 km दक्षिण में उरीका घाटी एक नदी के साथ-साथ बर्बर गाँवों से होती हुई उच्च एटलस में जाती है; पक्की सड़क के आख़िरी गाँव सेत्ती फ़ातमा से रास्ते झरनों की एक शृंखला तक चढ़ते हैं। मराकेश से लगभग 70 km दूर 1942 में बना तूबकाल राष्ट्रीय उद्यान जबल तूबकाल को घेरे हुए है, जो 4,167 m ऊँचाई के साथ मोरक्को की सबसे ऊँची चोटी है और साफ़ दिनों में शहर से दिखती है। इमलील गाँव आम तौर पर शुरुआती पड़ाव है, और चढ़ाई में आम तौर पर दो दिन लगते हैं।

लगभग 150 km उत्तर-पूर्व में ऊज़ूद जलप्रपात अल-अबीद नदी की घाटी में गिरता है। पश्चिम में अटलांटिक तट पर लगभग 175 km दूर दीवारों से घिरे बंदरगाह एस्साउइरा की मदीना 2001 में यूनेस्को की सूची में दर्ज हुई। तिज़ी न तिश्का दर्रे के पार, 1987 से यूनेस्को स्थल आइत बेन हद्दू का मिट्टी से बना क़िलेबंद गाँव (क़सर) सहारा और मराकेश के बीच के पुराने कारवाँ मार्ग की रखवाली करता है; यह एक लंबा दिन है, और कई यात्री पहाड़ों के उस पार एक रात रुककर सफ़र को बाँट लेते हैं।

यहाँ पहुँचना और घूमना-फिरना

मराकेश मेनारा हवाई अड्डा (RAK) शहर के केंद्र से लगभग 3 km दक्षिण-पश्चिम में है, इसलिए ज़्यादातर ठिकाने टैक्सी से थोड़ी ही दूरी पर हैं। मराकेश स्टेशन से कासाब्लांका, रबात, फ़ेज़, मेकनेस और टैंजियर के लिए ट्रेनें चलती हैं, और A7 टोल मोटरवे शहर को लगभग 210 km उत्तर में कासाब्लांका और लगभग 233 km दक्षिण-पश्चिम में अगादिर से जोड़ता है।

मदीना पैदल घूमना सबसे अच्छा है, और इसकी कई गलियाँ कारों के लिए बहुत संकरी हैं। मदीना, गेलीज़ और इवरनाज के बीच आने-जाने का सबसे आसान तरीक़ा टैक्सी है, और ट्रॉलीबसों वाली एक बस रैपिड ट्रांज़िट लाइन 2017 में खुली। एटलस की घाटियों, एस्साउइरा या आइत बेन हद्दू के लिए ड्राइवर समेत किराये की कार, संगठित टूर या रेंटल कार सबसे ज़्यादा लचीलापन देते हैं; पहाड़ी सड़कें घुमावदार हैं, इसलिए अतिरिक्त समय रखें।

प्रवेश के नियम आपकी नागरिकता पर निर्भर करते हैं, इसलिए यात्रा से पहले आधिकारिक स्रोत देख लें। मुद्रा मोरक्की दिरहम (MAD) है।

मौसम और घूमने का समय

मराकेश की जलवायु गर्म अर्ध-शुष्क है, जिसमें लंबी, गर्म और सूखी गर्मियाँ और छोटी सर्दियाँ होती हैं जो दिन में हल्की और रात में ठंडक भरी रहती हैं। औसत तापमान सर्दियों में लगभग 12°C से लेकर गर्मियों में 26 से 30°C के बीच रहता है, और गर्मियों की दोपहरें औसत के बताए से कहीं ज़्यादा गर्म हो सकती हैं। बारिश कम होती है, साल में लगभग 280 mm, और ज़्यादातर ठंडक वाले महीनों में होती है, जब क्षितिज पर उच्च एटलस की चोटियाँ अक्सर बर्फ़ से ढकी रहती हैं।

वसंत और पतझड़ में दिन गरमाहट भरे होते हैं, जो सूक़ों में घूमने और पहाड़ों में पैदल सैर के लिए ठीक हैं। सर्दियों के दिन अक्सर धूप भरे और घूमने के लिए सुहावने होते हैं, पर रात में रियाद ठंडे लग सकते हैं, इसलिए गरम कपड़ों की परतें साथ रखें। भरी गर्मी में बाहर घूमने की योजना सुबह और शाम के लिए बनाएँ और दोपहर में आराम करें। रमज़ान की तारीख़ें हर साल पहले खिसक जाती हैं, इसलिए यात्रा की योजना बनाते समय उन्हें देख लें।

जानना अच्छा है

मराकेश किस लिए जाना जाता है?

मराकेश अपनी दीवारों से घिरी मदीना के लिए जाना जाता है, जो 1985 से यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, जहाँ जमा अल-फ़ना चौक, सूक़ और कुतुबिया मस्जिद की 77 m ऊँची मीनार है। यह रियादों, बाहिया जैसे महलों, मजोरेल जैसे बाग़ों और उच्च एटलस के नज़ारों के लिए भी मशहूर है।

मराकेश में कहाँ ठहरना चाहिए?

माहौल के लिए मदीना में जमा अल-फ़ना और सूक़ों के पास किसी रियाद में ठहरें। गेलीज़ उन यात्रियों के लिए ठीक है जो आधुनिक केंद्र में अपार्टमेंट, दुकानें और कैफ़े चाहते हैं, इवरनाज दीवारों के पास विला और होटलों वाला शांत इलाक़ा है, और पाल्मरे परिवारों और समूहों के लिए बग़ीचों और पूल वाले विला देता है।

मराकेश घूमने का सबसे अच्छा समय कब है?

वसंत और पतझड़ आम तौर पर सबसे आरामदायक मौसम हैं, जब सूक़ों और पहाड़ी सैर के लिए दिन गरमाहट भरे होते हैं। सर्दी हल्की और दिन में अक्सर धूप भरी पर रात में ठंडक भरी होती है, जबकि गर्मी लंबी, गर्म और सूखी होती है, इसलिए घूमने की योजना सुबह और शाम के लिए बनाएँ।

मराकेश हवाई अड्डा मदीना से कितनी दूर है?

मराकेश मेनारा हवाई अड्डा (RAK) शहर के केंद्र से लगभग 3 km दक्षिण-पश्चिम में है, इसलिए मदीना, गेलीज़ और इवरनाज टैक्सी से थोड़ी ही दूरी पर हैं। मदीना की कई गलियों में कारें नहीं जा सकतीं, इसलिए अगर आप रियाद में ठहर रहे हैं, तो अपने मेज़बान से पूछ लें कि आपको कहाँ उतारा जाएगा और कौन लेने आएगा।

क्या ग़ैर-मुसलमान कुतुबिया मस्जिद जा सकते हैं?

नहीं। कुतुबिया में नमाज़ होती है और ग़ैर-मुसलमानों को भीतर जाने की अनुमति नहीं है, पर इसकी 12वीं सदी की मीनार और आसपास के बाग़ों का आनंद बाहर से लिया जा सकता है। बेन यूसुफ़ मदरसा, बाहिया महल और सादी मक़बरे जैसे ऐतिहासिक स्थल सभी पर्यटकों को मोरक्को की धार्मिक और महल वास्तुकला दिखाते हैं।

मराकेश में कितने दिन चाहिए?

तीन दिनों में इत्मीनान से मदीना, जमा अल-फ़ना, महल और मक़बरे और मजोरेल बाग़ देखे जा सकते हैं। पाँच या उससे ज़्यादा दिनों में आप उच्च एटलस में उरीका घाटी या इमलील, और एस्साउइरा या आइत बेन हद्दू की एक दिन की या रात भर रुकने वाली यात्रा जोड़ सकते हैं।

मराकेश में क्या पहनना चाहिए?

मराकेश में शालीन कपड़े सम्मानजनक माने जाते हैं, ख़ासकर मस्जिदों और दूसरे धार्मिक स्थलों के पास, और बाँहें और टाँगें ढकने वाले ढीले कपड़े गर्मी में आरामदायक रहते हैं। सर्दियों में, जब रातें ठंडक भरी होती हैं, एक गरम परत साथ लाएँ। रमज़ान के दौरान दिन में सार्वजनिक जगहों पर खाने, पीने या धूम्रपान से बचें, और यात्रा से पहले मौजूदा आधिकारिक सलाह देख लें।

मराकेश में कौन-सी मुद्रा चलती है?

मोरक्को में मोरक्की दिरहम (MAD) चलता है, जो 100 सांतीमात में बँटा है और अक्सर DH लिखा जाता है। सूक़ों में, खाने के स्टॉलों पर और छोटी टैक्सियों के लिए नक़दी काम आती है, और बाज़ारों में दाम पर मोलभाव आम है, इसलिए छोटे नोट साथ रखें।

AI की सहायता से शोध और लेखन किया गया, फिर नीचे दिए गए स्रोतों से तथ्यों की जाँच की गई। अंतिम जाँच: ।

स्रोत (20)